Category Archives:  Spiritual

भूलकर भी भगवान पर नहीं चढ़ाएं खंडित चावल, पूजा करते समय इन बातो का रखे विशेष ख्याल..

Jun 27 2019

Posted By:  AMIT

हिन्दू धर्म में ईस्वर की आरधना मूर्ति पूजन के रूप में होती है | पूजन के समय तमाम तरह के जरूरी सामान का इस्तेमाल किया जाता है | घर या बाहर मौजूद मंदिर में भगवन की पूजा में अर्पित की जाने बाली सामग्री पूजा को सफल बनाने में प्रयोग की जाती है | हिंदू धर्म में पूजा-पाठ बहुत ध्यान से किया जाता है जैसे पूजा की थाली में धूप, अक्षत (चावल), रोली, भोग, चंदन, फूल जैसी कई चीजों को सम्मलित किया जाता है | जिससे पूजा का सीधे कनेक्शन भगवान तक पहुंच सके | भगवान पूजा को स्वीकार कर मनबांछित फल प्रदान करे |


मगर कभी-कभी जाने-अनजाने में हम पूजा करने वाले कुछ ऐसी चीजों को पूजा में शामिल कर लेते है जो नहीं लेना चाहिए | इन्ही में से एक प्रभु को अक्षत अर्पण करना | लेकिन अक्षत (चावल) अर्पण करते बक्त हम इस बात को भूल जाते है, कि खंडित अक्षत पूजा में निषेध(अस्वीकार) माने जाते है | जिसकी बजह से हमारी पूजा सफल नहीं मानी जाती है | इसके अलावा भी कई बातें होती है जो पूजा के दौरान याद रखनी चाहिए | जिससे पूजा पूर्ण रूप से संपन्न हो, और भगवन खुश हो कर मनोकामना को पूर्ण करे | तो आइये जानते है, विस्तार से |


किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवी-देवता, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना आवश्यक है | पूजन में चावल विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं | पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो खंडित या टूटे हुए ना हो | चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला कर लेना चाहिए | पानी में हल्दी घोलकर उसमें चावल को डूबो कर पीला किया जा सकता है |


भगवान को चावल चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि चावल टूटे हुए न हों | अक्षत पूर्णता का प्रतीक है अत: सभी चावल अखंडित होने चाहिए | मात्र 4 दाने चावल रोज चढ़ाने से अपार ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है | चावल साफ एवं स्वच्छ होने चाहिए | शिवलिंग पर अक्षत चावल चढ़ाने से शिवजी अतिप्रसन्न होते है और अखंडित चावल की तरह अखंडित धन, मान-सम्मान प्रदान करते हैं | याद रखें खंडित चावल कभी भी शिव स्वीकार नहीं करते |


पूजन के समय ध्यान रखने योग्य बातें 
पूजन में पान का पत्ता भी अर्पित किया जाता है | ध्यान रखें कि केवल पान का पत्ता अर्पित ना करें, इसके साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए | पूरा बना हुआ पान अर्पित करेंगे तो श्रेष्ठ रहेगा | देवी-देवताओं के सामने घी और तेल, दोनों के ही दीपक जलाने चाहिए | यदि आप प्रतिदिन घी का दीपक घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष दूर हो जाएंगे | किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत, कुमकुम, चंदन, पुष्प, प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए | पूजन में हम जिस आसन पर बैठते है, उसे पैरों से इधर-उधर खिसकाना नहीं चाहिए | आसन को हाथों से ही खिसकाना चाहिए |



घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए | विशेष पूजा-पाठ किसी ब्राह्मण की मदद से करवाना चाहिए | ब्राह्मण सही विधि-विधान से पूजा करवाएंगे तो शुभ फल जल्दी मिल सकते हैं | देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से जरूर धो लेना चाहिए |


घर या बाहर मंदिर में पूजा करते समय ध्यान करना बेहद जरूरी समझा जाता है | बगैर ध्यान के पूजा निष्फल व अमान्य समझी जाती है | धर्म शास्त्रों के आधार पर, पूजा करते बक्त इस बात का विशेष ख्याल रखे, कि माहौल शांत, सुखद, व सौहार्द्य से परिपूर्ण हो | किसी भी रूप में पूजा के बक्त बातचीत, विघ्न व पूजा से वार बार उठकर किसी अन्य जगह चले जाना | पूजा को खंडित कर देता है, पूजा के समय मन शांत रहना चाहिए |


धार्मिक मान्यताओं के आधार पर, पूजा के समय मन में किसी प्रकार का कुंचित, कुंठित व बैर भाव पूजा को निष्फल कर देता है | किसी अन्य के लिए बुरे मन से पूजा करना निष्फल समझी जाती है | भगवन क्रोधित हो, दंड देते है | पूजा के समय मन एकांत से परिपूर्ण व शांत रखना चाहिए | सीधे शब्दों में कहे, तो अपने आराध्य की पूजा के समय सामाजिक बातो की चिंता छोड़ केवल पूजा के कार्य पर ध्यान देने से पुण्य लाभ मिलता है |


पूजा करते समय, किसी अन्य ब्यक्ति के द्वारा टोका जाना भी अशुभ मान जाता है | धार्मिक मान्यताओं के आधार पर, पूजा के समय बीच में टोकना व मन में गुस्से का भाव लाना पूजा को निष्फल कर देता है | पूजा करते समय अपने आस पास साफ़ सफाई का ख्याल जरूर रखना चाहिए | गन्दी जगह बैठ कर पूजा अस्वीकार समझी जाती है | साफ़ सब्दो में कहा जाए, तो साफ़ मन और साफ़ जगह एक बार प्रभु का सच्चे मन से नाम मात्र लेने से ही पूजा पूर्ण हो जाती है |


पूजा के समय सबसे ध्यान योग्य बात यह है, कि अपने आराध्य की पूजा के समय उनके पसंद की पूजन सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाना शुभ माना जाता है | उदहारण के तौर पर अगर आपके आराध्य को गेंदे के फूल पसंद है तो उन्हें बही अर्पण करे | इस बात का विशेष ध्यान रखे पूजन के समय आराध्य की पसंद की ही पूजा सामग्री का इस्तेमान करने से मनबांछित फल की प्राप्ति होती है | जिस देवी देवता की पूजा कर रहे है, उसकी पसंद का एक फल और फूल पूजा में जरूर अर्पण करे | 
  सरकारी/गैरसरकारी नौकरीयो की ताजा अपडेट पाए अब अपने मोबाइल पर साथ ही रोजाना करंट अफेयर